कुशल औद्योगिक रणनीतिकार नटराजन चंद्रशेखरन

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Sun, 24 Nov, 2019 19:01 PM IST

नटराजन चंद्रशेखरन वर्तमान में टाटा समूह के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। श्री चंद्रशेखरन ने कुशल औद्योगिक रणनीति और व्यावसायिक कुशाग्रता के माध्यम से टाटा समूह की औद्योगिक उपस्थिति को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने का काम किया है। श्री चंद्रशेखरन को टाटा समूह में एक दूरदर्शी लीडर के रूप में देखा जाता है। टाटा समूह के चेयरमैन के रूप में वह जिस शानदार तरीके से अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं, वह अपने आप में अत्यंत सराहनीय है। इतने विशाल औद्योगिक समूह का नेतृत्व करना कोई आसान काम नहीं है। आज चंद्रशेखरन टाटा समूह की १०० से अधिक कंपनियों के संचालक हैं, जिनका कुल व्यवसाय १०० बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है। वे २०१६ में टाटा समूह के बोर्ड में शामिल हुए और जनवरी २०१७ में उन्हें समूह का चेयरमैन नियुक्त किया गया।

चंद्रशेखरन टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा पॉवर, टाटा ग्लोबल बेवरेजेस लिमिटेड, इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) सहित कई समूह संचालन कंपनियों के बोर्डों की भी अध्यक्षता करते हैं। इन सभी में वे २००९-१७ के दौरान मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे। टाटा समूह की कंपनियों में संयुक्त रूप से बाजार पूंजीकरण के साथ 29 सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध निगम शामिल हैं जो २०१७ की शुरुआत में १२० बिलियन डॉलर से अधिक थे।

श्री चंद्रशेखरन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान ही टीसीएस में शामिल हुए। उसके बाद ३० सालों तक अलग-अलग पदों पर काम करने के बाद उन्हें दुनिया की सबसे बड़ी आईटी समाधान और परामर्श देने वाली कंपनी टीसीएस का चेयरमैन बनाया गया। टाटा समूह में अपने पेशेवर कैरियर के अलावा, चंद्रा को २०१६ में भारतीय रिजर्व़ बैंक के निदेशक मंडल के सदस्य के रूप में भी नियुक्त किया गया था। २०१८ में श्री चंद्रशेखरन को सिंगापुर के आर्थिक विकास बोर्ड के अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में नियुक्त किया गया। चंद्रशेखरन भारतीय प्रबंधन संस्थान, लखनऊ के अध्यक्ष होने के साथ-साथ भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु में जूरी के अध्यक्ष भी हैं। वह बोकोनी यूनिवर्सिटी के अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य और भारत अमेरिका सीईओ फोरम के उपाध्यक्ष भी हैं।

श्री चंद्रशेखरन को राष्ट्रीय – अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी विश्वविद्यालयों द्वारा कई मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया है। इनमें मैक्वेरी विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया के एक डॉक्टरेट ऑफ़ लेटर्स और रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज, त्रिची, तमिलनाडु के डॉक्टर ऑफ लेटर्स शामिल हैं, जहाँ उन्होंने १९८७ में कंप्यूटर एप्लीकेशन में मास्टर्स की डिग्री पूरी की थी।

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