कर्तव्यनिष्ठ राजनेता हैं देवेन्द्र फडणवीस

एड. अखिलेश चौबे
Sat, 02 Oct, 2021 10:46 AM IST

बहुमुखी प्रतिभा के धनी,सफल राजनेता, व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में उत्कृष्ट शख्सियत के परिचायक देवेन्द्र फडणवीस की जीवन यात्रा बेहद शानदार रही है। देवेन्द्र फडणवीस महाराष्ट्र की राजनीति में वो चेहरा हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा, लगन और तत्परता से नित नए मुकाम को हासिल किया। यह अनथक यात्रा नागपुर का मेयर बनने से लेकर महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री बनने और अब मुखर नेता प्रतिपक्ष की है। वर्तमान में महाराष्ट्र के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता के रूप में वह लोकतांत्रिक व्यवस्था में रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं।

देवेन्द्र फडणवीस पžाई के मामले में शुरू से ही प्रखर और ओजस्वी रहे हैं। उन्होंने ग्रेजुएशन में लॉ की पžाई की है और इसी के साथ – साथ बिजनेस मैनेजमेंट और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की प़ढाई की। इस प्रकार फडणवीस के पास विधि की डिग्री है और बिजनेस मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री है। उनका विद्वत्तापूर्ण व्यवहार सबको चकित तो करता ही है इसके साथ – साथ प्रेरित भी करता है। उनके तमाम कौशलों में लेखन भी शामिल है। उन्होंने अर्थशास्त्र में दो पुस्तकें भी लिखी हैं। पžाई के दौरान ही वे एबीवीपी से जुड़े रहे और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता के रूप में वे स्थानीय नेताओं के साथ राजनीति का ककहरा सीखते रहे। देवेन्द्र फडणवीस अपने कार्यों और दायित्वों के प्रति बेहद संजीदगी से समर्पित रहे हैं। देवेन्द्र फडणवीस जब नागपुर के मेयर बने तो उस समय वे देश में सबसे कम उम्र के मेयर बने थे। मेयर के रूप में उनकी कार्यशैली और तत्परता का लाभ नागपुर के नगर निगम को मिला और यहीं से उनकी लोकप्रियता में इजाफा होता गया। नागपुर के एक युवा पार्षद से लेकर राज्य के सबसे ताकतवर नेता के तौर पर फडणवीस का राजनीतिक विकास अद्भुत है। फडणवीस का २०१३ में महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष बनने के पीछे उनका किसी भी कैंप से संबंध न होना था। तमाम चेहरों के बीच भाजपा केन्द्रीय नेतÀत्व ने उन्हें प्रदेश की कमान सौंपी, उनके व्यक्तित्व की विनम्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शीर्ष नेतÀत्व के इस निर्णय का सभी ने स्वागत किया।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपने काम के दौरान, कठोर परिश्रम से देवेन्द्र फडणवीस ने मोदी-शाह का विश्वास जीता था। मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद देवेन्द्र फडणवीस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली को अपनाया। महाराष्ट्र के राजनीतिक इतिहास में बहुत कम ही राजनेता ऐसे हुए हैं जिन्होंने अपना ५ वर्ष का मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल पूरा किया हो। फडणवीस के सामने कई संकट की स्थिति पैदा हुई, लेकिन उन्होंने न केवल अंदरूनी प्रतिद्वंद्विता को काबू किया बल्कि गठबंधन की सहयोगी शिवसेना से उपजी प्रतिकूल परिस्थितियों का भी बखूबी सामना किया। अपनी समन्वय शक्ति और परिश्रम के कारण वे नरेंद्र मोदी और अमित शाह के सबसे अधिक विश्वासपात्र बने हुए हैं। उनकी लोकप्रियता और कर्तव्यपरायणता का सबसे जीता जागता सबूत यह है कि वे आज महाराष्ट्र भाजपा की सबसे महत्वपूर्ण धुरी बने हुए हैं। देवेन्द्र फडणवीस विपक्ष में रहते हुए भी जनहित कार्यो के प्रति सक्रिय रहते हैं और उन्होंने कोरोना काल में राज्य सरकार की अनेक मुद्दों पर खुलकर रचनात्मक आलोचना भी की है। इसके साथ ही उन्हाेंने अपने स्तर पर लोगाें की यथा सम्भव सहायता भी की है। कोरोना काल में उन्होंने महाराष्ट्र की जनता के लिए आवाज उठाई और इसके साथ ही उन्हाेंने गांव-गांव तक लोगांे से सम्पर्क किया जिससे सफल राजनेता का उनका सम्वेदनशील चेहरा सामने आया। देवेन्द्र फडणवीस विपक्ष में रहते हुए महाराष्ट्र भाजपा के लिए चाणक्य की भूमिका में काम कर रहे हैं। इसके साथ ही साथ उन्हाेंने समय – समय पर वर्तमान सरकार को अनेक नीतियों पर अपने अनुभव के आधार पर रचनात्मक सुझाव भी दिया है, जिससे महाराष्ट्र की जनता में उनके प्रति विश्वास की भावना और सुदृ़ढ हुई है। पिछले कई महीने से वह लगातार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, समाचार पत्र, सोशल मीडिया एवं विभिन्न माध्यमों से कोरोना टेस्टिंग,दवा उपलब्धता, रेमडेसिवीर, ऑक्सिजन सप्लाई और अन्य आवश्यक चीजों के लिए आवाज उठाते रहे हैं। इसके साथ ही उन्हाेंने भाजपा के कार्यकर्ताओं के माध्यम से लोगों तक अपनी जनकल्याणकारी सोच के मुताबिक व्यापक स्तर पर सहयोग भी किया है। यही कारण है कि वर्तमान में देवेन्द्र फडणवीस को राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में एक जिम्मेदार, जनसमस्याओं के प्रति गम्भीर, दूददर्शी एवं विजनरी नेता के रूप में जाना जाता है। कुल मिलाकर हम देखें तो जो भी दायित्व फडणवीस के सामने आया उसका निर्वहन उन्होंने पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ किया है। भारतीय राजनीति में जज्बा, जुनून और उत्साह से परिपूर्ण इस लोकप्रिय राजनेता को राजनीति की रपटीली राहों पर अभी लंबा और शानदार सफर तय करना है।

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