सुरक्षा और विश्वास

आलोक रंजन तिवारी
Thu, 14 Oct, 2021 11:54 AM IST

डिजिटल दौर में डेटा सिक्योरिटी आज की सबसे बड़ी जरूरत है। यही वजह है कि हर क्षेत्र में इसे लेकर सतर्कता ब़ढती जा रही है। मौजूदा डिजिटल युग में डेटा एक मूल्यवान संसाधन है, जिसे अनियमित नहीं छो़डा जाना चाहिये। यह समय भारत के लिए एक मजबूत डेटा सुरक्षा कानून की दृष्टि से काफी महत्त्वपूर्ण है।

अनेक समस्याओं के बाद भी इसमें कोई संदेह नहीं कि सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी ने एक नई आर्थिक – सामाजिक क्रांति को जन्म दिया है, जिसने विकास की प्रक्रिया को तेजी से आगे ब़ढाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सूचना प्रौद्योगिकी सामाजिक परिवर्तन का एक प्रभावशाली माध्यम है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि सामाजिक परिवर्तन लाने में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की अपनी कुछ सीमाएं हैं। सूचना प्रौद्योगिकी ने दुनिया की सम्पूर्ण कार्यप्रणाली के मूल स्वरूप को बदलने में बड़ी भूमिका अदा की है। आज शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, प्रशासन, सरकार, उद्योग, अनुसंधान और विभिन्न क्षेत्रों की कार्यशैली में अहम बदलाव देखे जा रहे हैं। इन क्षेत्रों में काम करने के तरीके बदले हैं, कार्य निष्पादन में तीव्रता आयी है, पारदर्शिता का जन्म हुआ है और आधुनिक संसाधनों से सुसम्पन्न समाज विकास के पथ पर तेजी से आगे ब़ढ रहा है।

कम्प्यूटर की खोज २० वीं शताब्दी की सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। इस शताब्दी में आईटी क्रांति की शुरुआत हुई। सामाजिक परिवर्तन, प्रगति एवं विकास के साधन के रूप में सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति की भूमिका व्यापक स्तर पर स्वीकार की गई और यह उम्मीद भी की गई कि इसके प्रयोग से मानव जीवन को ब़डे सामाजिक और आर्थिक लाभ होंगे तथा विकास की प्रक्रिया में तेजी आयेगी और २१ वीं सदी में हम बेहतर समाज का गठन कर पायेंगे। लेकिन, मौजूदा दौर में तकनीक की दुनिया ने मानव समाज के समक्ष कई समस्याएं भी उत्पन्न कर दी है। आज सूचना (जिसे तकनीक की भाषा में डेटा कहा जाता है) का एक बड़ा व्यावसायिक साम्राज्य स्थापित हो गया है। लोगों की व्यक्तिगत सूचनाओं और जानकारियों के आधार पर व्यावसायिक कार्यशैली, उत्पादों की उपलब्धता और उसके प्रचार – प्रसार के तरीके तय किये जा रहे हैं। यह सब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के कारण संभव हो पा रहा है।

डेटा का यह खेल बड़ा दिलचस्प है। जिन एप्लिकेशन्स की पहुँच हमारे मोबाइल – लैपटॉप तक है, वो हमारी जानकारियाँ इकट्ठा कर ऐसी कंपनियों या वाणिज्यिक निकायों को देते हैं, जो उन्हीं सूचनाओं के आधार पर ग्राहकों को अपने उत्पाद पेश कर भारी लाभ कमा रहे हैं। डेटा की चोरी ने मानव समाज की निजता को बुरी तरह प्रभावित किया है। यही कारण है कि हर जगह अब सिक्योरिटी (सुरक्षा) और ट्रस्ट (विश्वास) की बात होने लगी है। कोविड -१९ महामारी के कारण डिजिटल माध्यम से अपने घरों से काम करने वाले लोगों की संख्या ब़ढने की वजह से साइबर हमलों और साइबर स्पेस में आपराधिक गतिविधियों में कद्धि हुई है। महामारी के दौरान तमाम कंपनियों, उद्योग संगठनों और सरकारी संस्थानों ने इस दिशा में भारी निवेश किये हैं और अब सुरक्षा को लोग सर्वाधिक आवश्यक तत्व की दृष्टि से भी देख रहे हैं।

जिस तरह किसी भी राष्ट्र के विकास में सुरक्षित वातावरण का होना अधिक जरूरी होता है, उसी तरह सूचना प्रौद्योगिकी की दुनिया में सिक्योरिटी का होना भी जरूरी है। व्यक्तिगत सूचनाओं की चोरी होना निजता के उल्लंघन का एक बहुत बड़ा मुद्दा है। लेकिन, यह विषय अब सिर्फ एक व्यक्ति तक ही सीमित न होकर पूरे जन समुदाय, औद्योगिक निकायों, प्रशासनिक ढांचे और राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय बन गया है। इसलिए, वर्तमान में इस क्षेत्र में भारी निवेश देखने को मिल रहा है। तकनीक पर हमारी निर्भरता तो है ही, चाहे आंशिक ही क्यों न हो। इसलिए, सुरक्षित कार्यप्रणाली का होना बहुत जरूरी हो गया है।
आज विश्व एक ऐसे दौर में है, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर सुरक्षा पर बहुत अधिक निर्भर करेगी। इसलिए, साइबरस्पेस के इस्तेमाल हेतु शासी मानदंडों और ढांचे के निर्माण पर जोर देते हुए, रक्षात्मक और अति महत्वपूर्ण, आक्रामक साइबर क्षमताओं का निर्माण करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। यही कारण है कि पूरी दुनिया में सिक्योरिटी (सुरक्षा) और ट्रस्ट (विश्वास) को लेकर तेजी से बात होने लगी है और लोग इस दिशा में सक्रियता के साथ आगे ब़ढ रहे हैं। व्यक्तियों या संस्थाओं को अपनी डाटा सुरक्षा हेतु केवल सरकार पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिये बल्कि खुद भी जागरूक रहना चाहिये। अपने मीडिया उपकरणों की सुरक्षा सेटिंग को अपडेट रखने के साथ ही अच्छे एंटीवायरस का उपयोग और जाली संदेशाें, लिंक और फ़ोनकॉल से सतर्क रहना चाहिये।

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