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डेल की स्थापना की संक्षिप्त कहानी

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डेल टेक्नोलॉजीज एक अमेरिकी बहुराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी कंपनी है जिसका मुख्यालय राउंड रॉक, टेक्सास में है। डेल के उत्पादों में पर्सनल कंप्यूटर, सर्वर, स्मार्टफोन, टेलीविजन, कंप्यूटर सॉपटवेयर, कंप्यूटर सुरक्षा और नेटवर्क सुरक्षा के साथ ही सूचना सुरक्षा सेवाएं भी शामिल हैं। डेल सम्पूर्ण राजस्व के हिसाब से संयुक्त राज्य अमेरिका के सबसे बड़े निगमों की रैंकिंग में ३५वें स्थान पर है। डेल तमाम कंपनियों और उद्योग समूहों को बेहतर डिजिटल भविष्य बनाने और उनकी कार्यशैली को बदलने में मदद करती है। यह कंपनी ग्राहकों को डेटा युग के लिए आईटी उद्योग की सबसे व्यापक और नवीन प्रौद्योगिकी तथा विभिन्न प्रकार की सेवाएँ प्रदान करती है। डेल और ईएमसी के विलय के परिणामस्वरूप २०१६ में इसे डेल टेक्नोलॉजीज के रूप में जाना जाने लगा। बहुत कम लोगों को डेल की स्थापना के बारे में पता होगा कि कब और कैसे दुनिया की इस लोकप्रिय कम्पनी की शुरुआत हुई।
दरअसल, अमेरिका के ह्यूस्टन में माइकल नाम के एक लड़के का जन्म हुआ। स्कूल की पढ़ाई के बाद बॉयलॉजी पžने के लिए उसका टेक्सास विश्वविद्यालय में दाखिल हो गया। माता-पिता चाहते थे कि उनका होनहार बेटा डॉक्टर बने। माता-पिता ने उन्हें १५ साल की उम्र में कम्प्यूटर भी लाकर दिया। माइकल की कम्प्यूटर में खासी रुचि थी और फिर एक ही साल बाद माइकल का बॉयलॉजी से मन ऊब गया। माइकल को कम्प्यूटर ज्यादा रोमांचक लगने लगा। माइकल का दिमाग इसमें दौड़ने लगा कि आखिर कम्प्यूटर काम कैसे करता है। माइकल ने अपने कम्प्यूटर के सारे पुर्जे खोलकर देखा कि आखिर यह बना कैसे है। माता-पिता को माइकल का ऐसा करना अजीब भी लगा। एक कंपनी के कम्प्यूटर को खोल देने के बाद माइकल ने दूसरी कंपनी का कम्प्यूटर खरीदकर लाया और उसे भी खोलकर देखा और समझा। दौड़-भाग रंग लाई। माइकल की समझ में आ गया कि कम्प्यूटर कैसे काम करता है और फिर माइकल ने स्टूडेंट रहते हुए डाक टिकट और अखबार बेचकर जो थोड़े बहुत पैसे कमाए थे, उनसे १९८४ में यूनिवर्सिटी के अपने कमरे में खुद कम्प्यूटर बनाना शुरू किया। उन्हाेंने कम्प्यूटर बना भी लिया। माइकल का सोचना था कि ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से कम्प्यूटर बनाना चाहिए। माइकल ने कंपनी शुरू कर दी और नाम रखा पीसीज लिमिटेड।
माइकल ग्राहकों को सीधे कम्प्यूटर बेचने में विश्वास करते थे इसलिए उनके कम्प्यूटर सस्ते थे। फिर वह ग्राहकों की सुविधा का भी ध्यान रखते थे। तो उनकी तरकीब और कारोबार दोनों चल निकले। १९८३ में माइकल ने कंपनी का नाम बदला और नया नाम दिया- डेल कम्प्यूटर कॉर्पोरेशन। धीरे-धीरे कारोबार बžता गया, क्योंकि माइकल डेल के काम करने का तरीका लोगों को बहुत पसंद आया। जब माइकल की उम्र २७ साल थी, तभी उनकी कंपनी की दुनियाभर में धूम मच गई। माइकल डेल दुनिया के सफलतम सीईओ की फोर्ब्स सूची में शामिल हो गए। आज माइकल डेल की कंपनी कम्प्यूटर के साथ अन्य बहुत-सी चीजों का कारोबार भी करती है। यह सब कुछ माइकल डेल के कुशाग्र बुद्धि के कारण संभव हुआ और महत्वपूर्ण बात तो यह है कि माइकल ने जब काम शुरू किया था, तब वह किशोरावस्था में ही थे।
छोटे-से कारोबार से मिली पहली सफलता ने माइकल डेल का आत्मविश्वास इतना बढ़ा दिया कि सन्‌ १९८८ में उन्होंने अपने नाम को ब्रांड बनाने का साहसिक निर्णय ले लिया। पीसी कम्प्यूटर्स लिमिटेड को उन्होंने डेल कम्प्यूटर्स के नाम से रजिस्टर करवाया और पब्लिक इश्यू के जरिए ८० मिलियन डॉलर इकट्ठा किए। आगामी चार साल में डेल कम्प्यूटर्स का कारोबार इतना बढ़ गया कि सन्‌ १९९२ में माइकल डेल सबसे कम उम्र (२७ वर्ष) में ऐसी कंपनी के संस्थापक सीईओ घोषित कर दिए गए, जो दुनिया की ५०० बड़ी कंपनियों में एक थी। सन्‌ १९९६ में उन्होंने सर्वर
लॉन्च किया, अचल सम्पदा क्षेत्र में प्रवेश किया और होम एन्टरटेन सिस्टम व पर्सनल डिवाइसेस भी बनाने लगे। सन्‌ १९९८ में अपने व अपने परिवार के निवेश पर अधिकतम मुनाफा कमाने की मंशा से माइकल डेल ने एमएसडी कैपिटल की स्थापना की और शेयरों व सिक्योरिटीज की ट्रेडिंग, प्राइवेट ईक्विटी में लेन-देन व रियल एस्टेट मार्केट में खरीद-फरोख्त करने लगे। माइकल डेल ने सांता मोनिका, न्यू यॉर्क व लंदन में कार्यालय खोलकर उन्हें प्रोफेशनल्स के सुपुर्द किया और खुद वॉच डॉग बनकर दैनिक गतिविधियों से दूर होने लगे। उनके अनुसार, मैंने जो भी कारोबार किया, उसमें ग्राहकों को ऑनलाइन बेहतर सेवा देने की कोशिशों को प्राथमिकता दी है। जो तेज गति से दौड़ते हैं, वे अक्सर दुर्घटना भी कर बैठते हैं। सन्‌ २०१० में निवेशकों को आधी-अधूरी जानकारी देने व अकाउंटिंग में गड़बड़ी के लिए माइकल डेल ने जहां ४ मिलियन डॉलर दंड चुकाया है, वहीं उनके द्वारा स्थापित माइकल सुजैन फाउंडेशन सारी दुनिया खासकर अमेरिका व भारत के बच्चों की शिक्षा व स्वास्थ्य पर अरबों डॉलर खर्च कर रहा है।
तेज चलने वाले जिंदगी के हर मैदान में खेल की तरह दौड़ लगाते हैं। ऐसे लोगों को सही समय पर, सही सुविधा व मार्गदर्शन के साथ मौका मिल जाए तो वे दूसरों से आधी उम्र में शिखर पर पहुंच जाते हैं। निःसंदेह तेज दौड़ लगाने के कारण उनसे चूक भी होती है, पर वे अपनी भूल सुधारने में भी देर नहीं करते। दुनिया के २५ वें सबसे धनी माइकल डेल इसी श्रेणी के सफल उद्यमी हैं। वर्तमान में माइकल, डेल टेक्नोलॉजीज के चेयरमैन और सीईओ हैं।

भारत में डेल की सफलता के उत्कृष्ट शिल्पकार

 

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