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मंजिल तक पहुँचाने वाले

OLA Cab को शुरू करने वाले भाविश शुरू से ही बिजनेस माइंडसेट के रहे हैं। २००८ में IIT बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद भाविश ने बेंगलोर स्थित माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च में २ साल नौकरी की।

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“जिस दिन से चला हूं मेरी मंज़लि पे नजऱ है आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा।”

देश के मशहूर शायर बशीर बद्र की ये लाइनें OLA के फाउंडर भाविश अग्रवाल पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। ओला की शुरुआत के बाद से ही भाविश अग्रवाल ने कभी पीछे मुड कर नहीं देखा। वह दिन – प्रतिदिन प्रगति के रास्ते पर चलते ही जा रहे हैं। आईआईटी से ग्रेजुएटभाविश अग्रवाल भारत के सबसे लोकप्रिय कैब एग्रीगेटर Ola Cabs के फाउंडर एवं सीईओ हैं। उन्होंने ओला कैब्स को पहली बार मुंबइ में शुरू किया था, लेकिन २०१० में भाविश ने अपने दोस्त अंकित भाटी के साथ बेंगलुरु में “OLA CABS” की स्थापना की।

आज से १०-१५ साल पहले कार की सवारी एक स्टेटस सिंबल मानी जाती थी। मध्यम वर्गीय परिवार के लिए खासकर वो लोग जिनकी सैलरी से बमुश्किल घर का खर्च निकल पाता था, उनके लिए तो कार खरीदना और उसमें घूमना एक सपने जैसा ही था। मगर OLA मुंबई से पासआउट भाविश अग्रवाल ने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का एक ऐसा मिश्रण बनाया कि उसके बाद इंडिया में ट्रैवल करने कातौर-तरीका ही बदल गया।

जोमैटो की तरह ही OLA के शुरू होने के पीछे भी एक रोचक कहानी है। OLA को शुरू करने वाले भाविश शुरू से ही बिजनेस माइंडसेट के रहे हैं। २००८ में IIT बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद भाविश ने बेंगलोर स्थित माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च में २ साल नौकरी की। इस दौरान भाविश ने २ पेटेंट फाइल किए और इंटरनेशनल ऐकडेमिक जर्नल में उनके ३ रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए। काम करने के दौरान ही उन्होंने Desitech.in नाम से एक ब्लॉग की शुरुआत की। उस ब्लॉग पर भाविश टेक्नॉलजी से जुड़े मुद्दों पर लेख लिखते थे। उस वक्त इंडिया में स्टार्टअप्स का दौर शुरू हो रहा था। दूसरी कंपनियों और तकनीकी विषयों पर लिखते हुए भाविश को ख्याल आया कि उन्हें भी खुद का कुछ शुरू करना चाहिए। उन्होंने ज्यादा सोचे बिना ही नौकरी से इस्तीफ़ा दे दिया और olatrip.com की शुरुआत की। और, यहीं से शुरू हुई ओला की कहानी।

दिसंबर, २०१० में Olaterip का बिजनेस मॉडल बदकर कैब बुकिंग सर्विस पर शिफ्ट कर दिया गया, और कंपनी का नाम हो गया Ola Cabs। आज ओला कैब्स के पास गाड़यिों की पूरी रेंज है। बाइक से लेकर ऑटो, माइक्रो, मिनी, प्राइम सेडान, प्राइम प्ले, प्राइमएसयूवी जैसे पूरी रेंज मौजूद है। जिसे कस्टमर्स बजट और अपनी सुविधा के हिसाब से चुन सकते हैं। मौजूदा वक्त में ओला भारत का सबसे बड़ा मोबिलिटी प्लेटफार्म है, जो भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और यूनाइटेड किंगडम के २५० सेअधिक शहरों में अपनी सेवाएँ प्रदान करता है। इसके १.५ मिलियन से अधिक ड्राइवर करोड़ों लोगों को उनकी मंजिल तक पहुँचाने का शानदार काम कर रहे हैं। ओला के फाउंडर भाविश अग्रवाल सस्टेनिबिलिटी को लेकर काफ़ी गंभीर हैं। इसलिए, उनके सुयोग्य नेतृत्व में कम्पनी ने २००२ में तमिलनाडु में लगभग ५०० एकडम़ें इलेक्ट्रिक वाहनों की मैन्युफैक्चरिंग के लिए व्यापक स्तर पर प्लांट स्थापित की। इस प्लांट के पासएक साल में १० लाख ४ व्हिलर वाहन और १ करोड़ २ व्हिलर वाहनों की प्रोडक्शन क्षमता है।

इलेक्ट्रिक वाहनों की मैन्युफ़ैक्चरिंग के लिए ओला द्वारा स्थापित उसकी सहायक कम्पनी “ओला इलेक्ट्रिक” ने भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट पर एक तरह से कब्जा कर लिया है। मई २०२३ की सेल्स रिपोर्ट ने तो इस पर मुहर भी लगा दी है। ओला इलेक्ट्रिक ने पिछले महीने सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक स्कूटर बेचने का नया रेकॉर्ड बनाया है, जो कि ३५००० यूनिट है। कंपनी ने ३० प्रतिशत से अधिक बाज़ार हिस्सेदारी के साथ ही ३०० प्रतिशत की साल-दर-साल (Ola) वृद्धि मई २०२३ की बिक्री के दौरान दर्ज की है, जो कि यह बताने के लिए काफी है कि ओला इलेक्ट्रिक ने न सिर्फ बैटरी से चलने वाली टू-व्हीलर खरीदने वालों के दिलों में जगह बना ली है, बल्कि आने वाले समय में और भी बहुत आकर्षक प्रोडक्ट्‌स लाने की नींव मजबूत कर रही है।

अभ्युदय वात्सल्यम डेस्क

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