निवेश के लिए व्यापक दृष्टिकोण की जरूरत है

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केंद्रीय बजट 2022 को पेश हुए अभी कुछ ही दिन हुए हैं। जैसा कि हम जानते हैं कि यह बजट पूंजीगत व्यय पर अधिक खर्च के साथ निवेश-आधारित विकास पर केंद्रित है। आमतौर पर, हर बजट के बाद थोड़ा शोर होता है कि कहां निवेश करें या अपने मौजूदा निवेश में क्या जरूरी बदलाव करें। ऐसे में यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि निवेश के लिए हमारा दृष्टिकोण हमेशा हमारे व्यक्तिगत लक्ष्यों और परिसंपत्ति वर्ग के हमारे दीर्घकालिक उद्देश्यों की पूर्ति पर आधारित होना चाहिए। केंद्रीय बजट मात्र अर्थव्यवस्था के मूल सिद्धांतों का एक संकेत देता है। अपने निवेश निर्णयों को बजट पर आधारित करने से हमारी पोर्टफोलियो रणनीति केवल जोखिम में ही जाएगी। इसलिए, परिसंपत्ति आवंटन हमारा शुरुआती बिंदु होना चाहिए।

परिसंपत्ति आवंटन का निर्णय लेते समय प्रमुख रूप से दो बातों पर गौर करना चाहिए। सबसे पहले, हमें अपने निवेश की समय सीमा तय करनी होगी। हमारी समय सीमा जितनी लंबी होगी, हमारा आवंटन इक्विटी में उतना ही अधिक हो सकता है। फिर हमें अधिकतम अस्थायी गिरावट का पता लगाना होगा, जिसे हम अपने इक्विटी पोर्टफोलियो में जगह दे सकते हैं। हमें यह भी याद रखना चाहिए कि लगभग हर साल 10-20% की गिरावट होती है और 30-60% की बड़ी गिरावट हर 7 से 10 साल में होती है। यदि हम उच्च अस्थायी गिरावट को संभाल सकते हैं, तो हमारा इक्विटी आवंटन अधिक हो सकता है। यदि नहीं, तो इक्विटी आवंटन कम होना चाहिए और उसी के अनुसार पोर्टफोलियो रिटर्न की उम्मीद भी कम होनी चाहिए। इस ट्रेड-ऑफ के आधार पर, हम सभी इक्विटी और फिक्स्ड इनकम (निश्चित आय) के बीच अपने आदर्श परिसंपत्ति आवंटन पर पहुंच सकते हैं।

हम 5-7 साल की समय सीमा में भारतीय इक्विटी को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। यह दृष्टिकोण अगले कुछ वर्षों में एक मजबूत आय वृद्धि के माहौल के लिए हमारी अपेक्षाओं से प्रेरित है। केंद्रीय बजट ने विकास को सबसे आगे रखा है और यह उपरोक्त दृष्टिकोण को और अधिक विश्वास दिलाता है। वित्त वर्ष 23 के लिए निर्धारित उच्च पूंजीगत व्यय की वजह से गुणक प्रभाव आने वाले वर्षों में आय वृद्धि का समर्थन कर सकते हैं, जो इक्विटी बाजारों के लिए काफी सकारात्मक है। हम सब इक्विटी हिस्से (मूल संपत्ति आवंटन के अनुसार) में निवेश करने के लिए एक विविध दृष्टिकोण पसंद करते हैं। यह पांच अलग-अलग शैलियों – गुणवत्ता, जीएआरपी (उचित मूल्य पर विकास), मूल्य, मिड और स्मॉल व ग्लोबल फंड्स में समान रूप से निवेश कर हासिल किया जा सकता है। यह समग्र दृष्टिकोण आपको काफी कम अस्थिरता के साथ 5 से अधिक वर्ष की अवधि में बेहतर प्रदर्शन प्राप्त करने में मदद कर सकता है।

लार्ज-कैप कंपनी में निवेश करने से मिलने वाले फायदें और नुकसान मिड और स्मॉल-कैप कंपनियों में निवेश करने के फायदें और नुकसान से अलग होते हैं क्योंकि इन सभी कंपनियों की वृद्धि और उनमें होने वाले परिवर्तन के चरण अलग-अलग होते हैं। लार्ज-कैप कंपनी के स्टॉक्स अच्छी तरह से स्थापित और स्थिर होते हैं, लेकिन उनमें किए गए निवेश में वृद्धि की संभावना ज्यादा नहीं है, जबकि स्मॉल और मिड-कैप स्टॉक्स ज्यादा अस्थिर होते हैं क्योंकि वे बाजार में नए हैं, लेकिन उनमें विकास की संभावनाएं काफी ज्यादा होती हैं। दिए गए किसी एक सेगमेंट में एक के बजाय विभिन्न कंपनियों में निवेश करने से आपके निवेश में सही विविधता आ सकती है।

जब हम अपने निवेश के प्रति एक व्यवस्थित दृष्टिकोण को अपनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे होते हैं, तब बाजार के अस्थायी रुझानों के आधार पर अल्पकालिक निवेश करने की हमारी संभावना कम होती है। विविधीकरण एक संगठित दृष्टिकोण है, भले ही अल्पावधि में ज्यादा नुकसान दिखाई दे रहा हो, लेकिन दीर्घावधि में उसे कम किया जा सकता है। हमारे – आपके लिए यह केवल एक अस्थायी गड़बड़ से अधिक कुछ नहीं है क्योंकि हम सबका लक्ष्य दीर्घकालिक विकास और लाभ प्राप्त करना है। याद रखें कि बाज़ार में गति हमेशा बनी रहेगी, लेकिन लंबी दौड़ में पोर्टफोलियो का विविधीकरण हमें सभी उतार-चढ़ावों से बचाता रहेगा।

आलोक रंजन तिवारी