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मनोज मुन्तशिर

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जब लता दी ने कहा था राम तो स्वयं कविता हैं

उस दिन जो मैंने महसूस किया, उसे लिख पाऊं, ऐसी क़लम में आज तक नहीं ढूंढ पाया । क्या लता मंगेशकर इतनी सहज हो...

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