बेहतर रिटर्न की गारंटी का पर्याय – कल्पेन पारेख

आर्थिक लाभ की इच्छा सभी होती है लेकिन उचित आर्थिक निर्णय लेने का विवेक और लाभ की प्रतीक्षा का संयम सब में नहीं होता। कल्पेन जी जैसे व्यक्ति इसी बुनियाद पर काम करते हैं कि कैसे बचत को एक बेहतर लाभ में बदला जाए और लोगों को बेहतर आर्थिक निर्णय के लिए तैयार किया जा सके।

पढ़ाई और कैरियर

ल्पेन पारेख डीएसपी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। कल्पेन को क्लाइंट सेगमेंट, डिस्ट्रीब्यूशन और मार्केटिंग में सेल्स का 19 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वह पहले आईडीएफसी म्यूचुअल फंड में प्रबंध निदेशक और बिक्री और विपणन प्रमुख थे। उन्होंने एलएंडटी फाइनेंस लिमिटेड के साथ अपना कैरियर शुरू करने के बाद बिड़ला सन लाइफ एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड में भी काम किया है।

कल्पेन की पढ़ाई भारतीय विद्यापीठ, पुणे से हुई है। इन्होंने इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की है। इसके बाद इन्होंने नासिक से प्रबंधन की पढ़ाई की। इसके बाद इन्होंने अपना कैरियर शुरू किया। 1998 जब ये कॉलेज में थे तब एल एंड टी की फाइनेंस टीम कैंपस सिलेक्शन के लिए आई हुई थी। इनका सिलेक्शन कंपनी की फिक्स्ड इनकम सेल में हुआ था और इस तरह इनकी कॉरपोरेट यात्रा की शुरुआत हुई।

वहॉं इनकी टीम ने मेहनत से रिसर्च करके कंपनी को यह सजेस्ट किया कि बाउंस में जो इन्वेस्टमेंट हो रहे हैं, उससे अलग म्यूच्यूअल फंड्स में भी इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं और यह बिल्कुल एक नया इनोवेशन था। हालॉंकि तब म्यूच्यूअल फंड्स इतने लोकप्रिय नहीं थे। इनका काम यही था कि अलग-अलग म्यूच्यूअल फंड्स की पहचान करना और उनका एक पोर्टफोलियो बनाना। इसी दौरान अलग-अलग म्युचुअल फंड्स के साथ इनकी बात हो रही थी। सबसे पहले इनकी बात प्रूडेंशियल लाइफ आईसीआईसीआई के साथ हो रही थी। उन दिनों वो एक नया रोल क्रिएट कर रहे थे जिसमें इन्हें एक्सटर्नल ऑडियंस और इंटरनल मनी मैनेजमेंट के लोगों के बीच लिंक बनकर काम करना था। इसे ‘इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटजिस्ट’ बोलते हैं। इस  प्रोफाइल के लिए इन्हें चुना  गया और म्युचुअल फंड्स की ओर इनका यह पहला कदम था। लगभग आठ 9 साल आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ में इन्होंने काम किया। इसके बाद प्रूडेंशियल लाइफ की टीम बिरला म्युचुअल फंड्स की ओर मूव कर गई। अब तक कई अलग-अलग टीमों के साथ इन्हें 22 साल काम करने का मौका मिला है।

म्युचुअल फंड इंडस्ट्री की चुनौती के बारे में ये कहते हैं “लोगों की आय को बढ़ाना, उनकी संपत्ति का निर्माण करना मुख्य चुनौती है क्योंकि भारत एक मध्यम आय वाला देश है। एक और लोगों की उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं और दूसरी ओर महँगाई भी उसी अनुपात में है। प्रत्येक वर्ष लोगों की क्रय शक्ति कम हो रही है।” वो आगे कहते हैं कि क्रय क्षमता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। एक तथ्य यह भी है कि पिछले दो-तीन दशक से जब पैसों में तेजी होती है तो रिटर्न अच्छे नहीं होते जबकि मंदी में अच्छे रिटर्न मिलते हैं और मंदी में जल्दी कोई पैसे लगाते नहीं। इसे हम एक चुनौती के रूप में देखते हैं और कैसे इस चुनौती का सामना करें हम इस पर कार्य भी कर रहे हैं, कल्पेन कहते हैं।

भविष्य की कार्य-योजना

म्यूच्यूअल फंड्स की जो श्रेणी है वह बहुत  पारदर्शी है। पिछले 5 सालों में भारत में जो डिजिटाइजेशन हुआ है, उससे आज हर भारतीय के हाथ में एक मोबाइल है। इस प्रकार हर भारतीय के हाथ में एक ब्रांच खुल गई है। इस संदर्भ में कल्पेन कहते हैं “यह एक बड़ा अवसर है कि हम कैसे इन्हें म्युचुअल फंड्स की भाषा समझाएँ। कैसे हम इन्हें एक अच्छा निवेशक बनाएँ, यह हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य है।

आज इनकी कंपनी के पास 30 लाख निवेशक  हैं और यह और भी ज्यादा हो सकता है। इसके करीब 10 गुना बढ़ने की उम्मीद है । सिर्फ जागरूकता और शिक्षा से कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं आएगा क्योंकि यह ऐसा नहीं है कि इसमें सामने से लोगों का इंटरेस्ट हो। यह क्रिकेट नहीं है, यह फुटबॉल नहीं है। इसलिए कल्पेन कहते हैं कि हमारी अभी कोशिश है कि कैसे हम इसे भावनाओं के साथ, ड्रामा के साथ इन्वेस्टर्स तक पहुँचाएँ। अगले तीन-चार सालों में हम यह प्रयास करेंगे कि इन्वेस्टर को एक अच्छा इन्वेस्टर कैसे बनाएं। हमने 2 साल पहले स्टैंड अप कॉमेडियन के साथ इन्वेस्टमेंट के जो बायर्स हैं उसको लेकर एक सीरीज बनाई है। हमारी वेबसाइट पर लर्न के नाम से एक सेक्शन है जिसके एक फॉर्मेट के माध्यम से इन्वेस्टर्स यह सीख सकते हैं कि कैसे निवेश करें। इससे लोगों की समझ भी बढ़ती है और इन्वेस्ट के प्रति भी जागरूक भी होते हैं।

आगे वो कहते हैं कि दूसरा हमारा प्रयास है कि जो 33 लाख इन्वेस्टर्स भारत में हैं,सिर्फ उनके निवेश का ही प्रबंधन हम क्यों करें? हम दुनिया के बड़े लोगों के पैसों को भी मैनेज करें। दुनिया की दो बड़ी मैरिल लिंच और ब्लैक रब से हमारी अच्छी पार्टनरशिप हुई। इसकी वजह से हमारी कंपनी को लोग जानते हैं और आज की तारीख में हम 20000 करोड़ का अंतरराष्ट्रीय निवेश का प्रबंधन कर रहे है।  ये मानते हैं कि अगले 2 से 3 साल इनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

कोविड से निवेश बाजार पर पड़ने वाले असर के संदर्भ में वो कहते हैं कि इन्वेस्टर्स में एक उत्साह देखने को मिल रहा है, नए इन्वेस्टर्स हमसे जुड़ रहे हैं। इसके अलावा जो एक चीज हमें समझानी है कि बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है।

पिछले डेढ़ -दो साल में जो पैसा आया है वह ऊपर की साइकिल दिखा रही है। मंदी अभी के निवेशकों ने देखी नहीं है। 2000 से 2003 तक और 2008 से 2013 तक मार्केट का रिटर्न शून्य था। यहीं हमारे धैर्य की परीक्षा होती है। पिछले डेढ़ साल में जो हमने देखा वह टी-20 था। जब टेस्ट मैच हो तो हमारे इन्वेस्टर्स कितने तैयार हैं यह देखना बहुत जरूरी है। कल्पेन का मानना है कि इन्वेस्टर्स धीरे-धीरे समझ रहे हैं। उन्हें यह समझ आ रहा है कि अगर मुद्रास्फीति से पार मुनाफा कमाना है तो म्यूच्यूअल फंड्स जरूरी है।

इसके अलावा कंपनी के लिए बेहतर प्रोडक्ट तैयार के संदर्भ में इनका कहना है कि “आप यदि देखें तो हमारे दिन का खर्चा काफी ज्यादा ग्लोबल प्रोडक्ट्स पर हो रहा है। हम अगर आज फोन खरीदते हैं या वीडियो कॉन्फ्रेंस करते हैं जूम वगैरह पर, तो जूम को फायदा होता है। हमारे कंप्यूटर में माइक्रोसॉफ्ट एक्सल है जिससे माइक्रोसॉफ्ट को फायदा मिलता है। हम शॉपिंग करते हैं तो अमेजॉन को फायदा होता है। ‌ हमें किसी का एड्रेस ढूंढना होता है तो गूगल का फायदा होता है। इन सभी चीजों को ध्यान में रखते हुए हमारी कंपनी कार्य कर रही है।”

 

अच्छे रिटर्न का मंत्र

इस मामले में इनकी सलाह काफी बुनियादी किस्म की है। वो अपने व्यक्तिगत अनुभव के हवाले से बताते हैं कि पैसा तब बनता है जब निवेशक धैर्य दिखाता है। वो कहते हैं 1 साल 2 साल में जो रिटर्न होता है उसे हम कंपाउंडिंग नहीं बोलते हैं। कंपाउंडिंग हम तब कहते हैं जब निवेश 10- 20 से 30 साल तक का होता है। इसे करने के लिए हमें शुरुआत जल्दी करनी होती है क्योंकि जितनी जल्दी हम शुरुआत करेंगे उतना हमें टाइम पीरियड मिलता जाएगा। हम अगर इन्वेस्ट नियमित रूप से करें तो बाजार के उतार-चढ़ाव को हम क्रॉस कर सकते हैं।

उनका मानना है कि निवेश किसी को हराने या फिर जीतने के लिए नहीं बल्कि अपनी क्रय क्षमता बढ़ाने के लिए करते हैं।यह तभी होगा जब हम बाजार में लंबा समय बिताएंगे। इसके अलावा उनकी एक सलाह यह भी है कि सही ऐसेट एलोकेशन रखिए। “हमें पता है कि लॉन्ग टर्म में इक्विटी ऊपर जाने वाला है तो यदि मैं मंदी में खरीदूंगा तो ज्यादा अच्छा है। इंटरेस्ट रेट जब बढ़ा हो तब उसके पिछले वर्ष रिटर्न कम मिला होता है। अब जब इंटरेस्ट रेट बढ़ा हुआ है तब आगे 5 साल तक रिटर्न ज्यादा मिलता रहेगा”, कल्पेन कहते हैं। कुल मिलाकर बेहतर रिटर्न के लिए वो अच्छे फंड का चुनाव, सही सलाहकार, बाजार में लंबे समय तक टिकने और नियमित निवेश की सलाह देते हैं।

भारत के निवेश बाजार पर वो कहते हैं “हमेशा भौगोलिक रूप से ही देखना सही नहीं होगा। म्यूच्यूअल फंड अपने बिजनेस को छोटे या बड़े शहरों में क्यों बांटे। आज डिजिटलाइजेशन की वजह से छोटा या बड़ा कोई भी शहर हो, कोई भी गांव हो म्यूच्यूअल फंड हर जगह पहुँचा हुआ है। आपको अपने मोबाइल फोन में म्यूचुअल फंड का एक वीडियो देखना है। किसी म्युचुअल फंड की वेबसाइट पर जाकर आपको ट्रांजैक्शन भी करना है तो यह बेहद आसान है। इसकी शुरुआत हो चुकी है। पिछले डेढ़ 2 साल से डिजिटल एडॉप्शन बहुत तेजी से बढ़ रहा है।”

इसलिए उनका मानना है कि डिजिटल विस्तार आने वाले 5 सालों में ज्यादा तेजी से आगे बढ़ेगा। इसके अलावा बैंक अपनी शाखाओं के माध्यम से जो फंड्स बेचते हैं, म्यूच्यूअल फंड्स कंपनी अपनी ब्रांच के माध्यम से जितने फंड्स बेचते हैं, पिछले 2 या 3 वर्ष में जितने डिजिटल प्लेटफॉर्म बने हैं, उन्होंने जितने इन्वेस्टर्स को जोड़ा है उतना 25 सालों में नहीं हुआ है। यह एक उत्साहजनक बात है। अपनी पसंदीदा स्कीम के बारे में वो कहते हैं “सबसे ज्यादा पॉपुलर फंड मिडकैप है। स्मॉल कैप है। हम इसे नए रूप में लेकर सामने आ रहे हैं।

कोई निवेशक क्यों मनचाहा रिटर्न नहीं पा सकता है तो इसके जबाव में वो कहते हैं कि पहले तो ज्यादातर लोग तुरंत बहुत अधिक रिटर्न चाहते हैं। और यहीं चूक कर बैठते हैं। समझदार निवेशक ठीक से एसेट एलोकेशन जॉंचते है जबकि दूसरे किस्म के निवेशक पिछले पॉंच महीनों का रिजल्ट देखकर निवेश कर देते हैं। वो कहते हैं कि जो जोखिम को ठीक से समझता हो वही बेहतर रिटर्न पा सकता है। जोखिम आकलन के बाद बाजार में टिके रहना जरूरी है। “दुनिया का जो सबसे अमीर आदमी है वह 85 साल का इन्वेस्टर है, और उसके इन्वेस्टमेंट की जो यात्रा है वह 75 साल की है। उसका पोर्टफोलियो रिटर्न 21% है, लेकिन वह 21% की वजह से अमीर नहीं बना है, वह अमीर बना है 75 साल के लिए। इसलिए हम जितना टाइम देंगे अपने इन्वेस्ट को हमें उतना ही अच्छा रिटर्न मिलेगा”, कल्पेन कहते हैं।

काम के अलावा इन्हें पढ़ना और मूवीज देखना अच्छा लगता है। जगजीत सिंह की ग़ज़ल इन्हें प्रिय है। अपने बेटे के साथ समय बिताना इनकी प्राथमिकता में होता है। ये अपनी पत्नी,  बच्चे और पेरेंट्स के साथ रहते हैं। कंपनी के संचालन के बारे में ये कहते हैं “मैं चाहता हूं कि मेरी कंपनी को मैं रूल बेस्ड कंपनी बनाऊं। अनुशासन नियमों से आते हैं। मानव मन नियम नहीं मानना चाहता है। हमारा प्रयास है कि हम अच्छे नियम बनाएँ। अपनी भाषा के माध्यम से हम सरल और आसान रूल बनाएं ताकि इन्वेस्टर्स अच्छे से चीजों को समझ सकें।”

 

 

अभ्युदय वात्सल्यम डेस्क