आईडीएफसी को नई ऊँचाईयों पर पहुँचाने वाला नेतृत्व – विशाल कपूर

 श्री कपूर आईडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। इनके पास एसेट मैनेजमेंट, बैंकिंग और कंज्यूमर मार्केटिंग सहित विभिन्न कार्यों और व्यवसायों में वित्तीय सेवाओं में दो दशकों से अधिक का समृद्ध अनुभव है। श्री कपूर ने बैंक के क्षेत्रीय और देश प्रबंधन समूह के साथ-साथ ग्लोबल वेल्थ मैनेजमेंट लीडरशिप टीम सहित कई नेतृत्व समितियों में कार्य किया। वह स्टैंडर्ड चार्टर्ड सिक्योरिटीज इंडिया लिमिटेड के बोर्ड में निदेशक भी थे। अपने पहले के कार्यकाल में श्री कपूर अमेरिकन एक्सप्रेस और आईटीसी थ्रेडनीडल एएमसी से जुड़े रहे हैं। एमेक्स में, वह भारत में वरिष्ठ निदेशक और वित्तीय सलाहकार सेवाओं के प्रमुख थे। इन्होंने आईआईएम अहमदाबाद से प्रबंधन स्नातक की डिग्री हासिल की है और सेंट जेवियर्स कॉलेज, कोलकाता से वाणिज्य की पढ़ाई की है।

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वर्तमान प्रदर्शन और भविष्य की योजनाएँ

विशाल कहते हैं “पिछला साल हमारे लिए व्यस्त लेकिन काफी संतोषजनक रहा है। हम अपने उत्पादों में निवेशकों और वितरण भागीदारों के निरंतर विश्वास के कारण एयूएम में तेजी से बढ़े हैं। हमारे इक्विटी फंड निवेशकों को उभरते बाजारों से फायदा हुआ, जहॉं हमारे कई उत्पादों ने अपनी श्रेणी में अग्रणी प्रदर्शन किया था। निश्चित आय पक्ष पर, हमारे उच्च गुणवत्ता वाले निवेश ढांचे की ताकत ने हमारे निवेशकों को बारीक निवेश रणनीति के माध्यम से उत्कृष्ट मूल्य प्रदान किया है जिसने जोखिम और लाभ को सफलतापूर्वक संतुलित किया है। हमने कई नए और अभिनव उत्पादों के साथ-साथ रचनात्मक विपणन अभियान भी शुरू किए।”

भारतीय बाजार अपनी उच्च बचत दर, बचत आधिक्य को वित्तीय परिसंपत्तियों में बदलने और अधिक वित्तीय समावेशन की संभावनाओं के कारण विकास के जबरदस्त अवसर प्रदान करता है। म्युचुअल फंड भारतीय बचतकर्ताओं की विविध जरूरतों को पूरा करने के लिए प्राथमिक माध्यम के रूप में उभर रहे हैं। इसका कारण यह है कि ये अच्छी तरह से विनियमित हैं, ढेर सारे विकल्प प्रदान करते हैं और एक सफल प्रदर्शन ट्रैक रिकॉर्ड रखते हैं। विशाल कहते हैं ” इस वृद्धि के लिए अपने निवेशकों के आभारी हैं, लेकिन यह भी मानते हैं कि निवेशक अंततः अच्छे प्रदर्शन और लगातार सेवा को पुरस्कृत करते हैं। आईडीएफसी म्यूचुअल फंड में, हम अच्छी तरह से परिभाषित उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला के माध्यम से अपने निवेशकों को लगातार प्रदर्शन और सेवा प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, और हमें विश्वास है कि निवेशक हमें पुरस्कृत करना जारी रखेंगे, जिससे भविष्य में और भी तेज विकास हो सके।”

अगले 3 वर्षों में कंपनी के विस्तार के संबध में वो कहते हैं “हम प्रौद्योगिकी और सेवा सहित अपने उत्पादों और क्षमताओं के विकास में लगातार निवेश किया है। हम अपनी बिक्री और बाजार उपस्थिति का विस्तार कर रहे हैं तथा अपने फंड प्रबंधन और उत्पाद वितरण क्षमताओं को लगातार बढ़ा रहे हैं। हम आगे विकास के अवसरों को लेकर उत्साहित हैं।”

ओमिक्रोन और बाजार

 अस्थिरता बाजार की एक अंतर्निहित विशेषता है, इससे कोई बच नहीं सकता है। अनुशासित तरीके से एसआईपी के जरिए निवेश करना एक श्रेष्ठ तरीका है। अनिश्चित या अस्थिर बाजार स्थितियों में तो यह और भी जरूरी हो जाता है। अगले कुछ हफ्तों या महीनों में बाजार किस दिशा में जाएगा इसे नियंत्रित करना किसी के वश में नहीं है। ऐसे में व्यक्ति निवेश से लाभ के लिए अपने व्यवहार का प्रबंधन कर सकते हैं। अनावश्यक बाजार-भय और लालच के चक्र में न फँसना निवेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अपने निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखना, नियमितता बनाए रखना, उचित परिसंपत्ति आवंटन का पालन करना और बाजार में समय बिताना महत्वपूर्ण है, चाहे बाजार का चक्र कुछ भी हो।

वित्तीय वर्ष 2011 में भारत ने इक्विटी बाजारों में महत्वपूर्ण एफआईआई प्रवाह देखा है। देर से ही सही, नए कोविड वैरिएंट ओमिक्रोन के फैलने के डर, आपूर्ति में व्यवधान और उच्च मुद्रास्फीति के कारण यूएस फेड की अगली कार्रवाई पर चिंता के कारण अब एफआईआई प्रवाह नकारात्मक हो गया है। वैश्विक नीतियों का कुछ आनुषंगिक प्रभाव भारतीय बाजारों के लिए स्वाभाविक है। इक्विटी बाजारों में खुदरा निवेशकों की भागीदारी मजबूत बनी हुई है इसलिए ऐसा लगता वो इस गिरावट के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकेंगे।

भारतीय निवेशक और मुनाफा

अक्सर यह देखा गया है कि, आम तौर पर निवेशक तब बेचते हैं जब बाजार गिर रहा होता है और ऐसा ये डर से करते हैं, और जब बाजार में वृद्धि होती है और पिछले रिटर्न उत्कृष्ट होते हैं और ऐसा वो लालच और फियर-ऑफ-मिसिंग-आउट से के कारण करते हैं। उदाहरण के लिए, कई निवेशकों ने अपने एसआईपी को रोक दिया जब 2020 में बाजार में काफी गिरावट आई जब महामारी ने हमें मारा। हो सकता है कि उन्हें बाद में इस कार्रवाई पर पछतावा हुआ हो, क्योंकि बाजार तेजी से पलटे और महत्वपूर्ण रूप से पलटाव किया।

विशाल कहते हैं “किसी भी निवेशक के लिए यह आवश्यक है कि वो निवेश के अवसर को समझे और यह देखे कि निवेश उसके किसी उद्देश्य को पूरा करने में कैसे मददगार हो सकता है, न कि किसी लोकप्रियता या सनसनी के आधार पर निवेश निर्णय हो। अपने बचत को बरतते समय  नियामक और कराधान पहलुओं पर स्पष्टता भी बहुत महत्वपूर्ण है।” निवेश पर बेहतर रिटर्न पाने के सवाल पर वो कहते हैं “बाजार चक्र कुछ भी हो अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहना, अपने निर्धारित परिसंपत्ति आवंटन का पालन करना और बाजारों में समय व्यतीत करके अनुशासित रहना महत्वपूर्ण है।”

तकनीकी नवाचार का महत्व

विशाल कहते हैं “मुझे खुशी है कि म्युचुअल फंड उद्योग प्रौद्योगिकी विकास को सहजता से अपनाने में सबसे आगे रहा है। महामारी के सीमित गतिशीलता वाले दौर ने प्रौद्योगिकी और डिजिटल प्लेटफार्मों का लाभ उठाने के महत्व को एक बार फिर उजागर किया। निवेशक अपने निवेश को जारी रख सके और सुरक्षा के साथ घर रहते हुए अपनी आपातकालीन फंडिंग आवश्यकताओं को पूरा कर सके, क्योंकि म्युचुअल फंड सेवा लॉकडाउन में भी निर्बाध रूप से जारी रही।” प्रौद्योगिकी के महत्व को अच्छी तरह से स्वीकार किए जाने के साथ, म्यूचुअल फंडों के लिए यह और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा कि वे इस महत्वपूर्ण संसाधन का लाभ उठाकर अपनी सेवा की पेशकश को नया और विस्तारित करें। इसी संदर्भ में वो आगे कहते हैं “महामारी से एक यह सीख मिली कि ऑनलाइन और डिजिटल निष्पादन को मजबूत करना है। निवेशक ऑनलाइन लेन-देन करने में अधिक सहज होते जा रहे हैं, अब हम देश भर में निवेशकों की एक विस्तृत श्रृंखला से जुड़ने और उन्हें लेन-देन करने में मदद करने में सक्षम हो रहे हैं। हम निवेश के ऑनलाइन तरीकों को तेजी से अपनाने से उत्साहित हैं और भविष्य में इस चैनल को मजबूत करना जारी रखने का इरादा रखते हैं।”

तकनीकी नवाचार के साथ ही वो निवेशकों की शिक्षा पर भी बहुत बल देने के पक्षधर हैं। इस संदर्भ में इनका कहना है “वित्तीय साक्षरता का विस्तार हमारे संगठन के केंद्रीय उद्देश्यों में शामिल रहा  है और मुझे खुशी है कि आईडीएफसी म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए अत्यधिक रचनात्मक जागरूकता अभियान संचालित करने में सबसे आगे रहा है। हमने इस दिशा में कई अग्रणी पहलें की हैं, जिनमें से प्रत्येक ने एक सरल और संबंधित संचार शैली का उपयोग किया है। उदाहरण के लिए, हम निवेशकों को शिक्षित करने के लिए लोकप्रिय फिल्मों के माध्यम से संचार की क्षमता का उपयोग करने वाले पहले थे। चाहे वह कम उम्र में निवेश की प्रासंगिकता हो, या कंपाउंडिंग की शक्ति हो या हमारी लघु फिल्म ‘वन इडियट’ और और उसके सीक्वल ‘रिटर्न ऑफ वन इडियट’ के माध्यम से सेवानिवृत्ति योजना के महत्व को समझाना हो, हमने सफलतापूर्वक जागरूकता अभियान चलाया। हमने निवेश करते समय व्यवहार संबंधी पूर्वाग्रहों को उजागर करने पर भी काम किया है और इस क्षेत्र में अग्रणी वैश्विक विशेषज्ञों में से एक, रॉल्फ डोबेली के साथ वीडियो की एक श्रृंखला विकसित की है। हम ‘आईडीएफसी गेम ऑफ लाइफ’ और ‘सम की समस्या’ जैसी संवादात्मक पहल की पेशकश करना जारी रखते हैं, जो वित्तीय जरूरतों को समझने के लिए एक भूमिका-आधारित दृष्टिकोण है। हमारे नवीनतम विज्ञापन अभियान अपरंपरागत तरीके से सरल संदेश देना जारी रखते हैं। अब हम अपना अगला अभियान #InvestmentMeinNoEmotion शुरू करने की प्रक्रिया में हैं। यह अभियान भावनाओं को किसी के निवेश को प्रभावित करने की अनुमति देने के नुकसान पर प्रकाश डालता है, और बैलेंस्ड एडवांटेज फंड श्रेणी के लिए जागरूकता पैदा करेगा जो निवेश करते समय भावनाओं से बचने में मदद कर सकता है। बैलेंस्ड एडवांटेज फंड गतिशील परिसंपति आवंटन नीति को अपनाते हुए डेट और इक्विटी दोनों में निवेश करते हैं। इस तरह की रणनीति निवेश करते समय मानवीय पूर्वाग्रह को दूर करने में मदद कर सकती है, इस प्रकार निवेशकों को निवेशित रहने के लिए प्रोत्साहित करती है और उनकी भावनाओं से दूर नहीं जाती है।”

आईडीएफसी एमएफ द्वारा निकट भविष्य में नए फंड लॉन्च करने के संदर्भ में इनका कहना है “बिल्कुल, हम भारतीय निवेशकों के लिए नवोन्मेषी उत्पाद लाते रहेंगे। पिछले साल, हमने अपने फ्लोटिंग रेट फंड, यूएस ग्रोथ फंड ऑफ फंड, हमारे मल्टी कैप फंड सहित कई नए उत्पाद लॉन्च किए और सरकारी प्रतिभूति आधारित लक्ष्य परिपक्वता फंड लॉन्च करने वाले पहले थे। हमने कई नए फंडों की योजना बनाई हैं, जिनमें से प्रत्येक एक विशिष्ट बाजार अवसर को लक्षित कर रहा है और आप अगले कुछ महीनों में उन्हें ये पेशकश करते देखेंगे।”

 

 

 

 

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