निवेश से समृद्धि की ओर – सौरभ नानावटी

हर समय की अपनी कुछ खास विशेषताएँ होती हैं जिनसे अर्थव्यवस्था की बुनियादी संरचना निर्मित होती है। वर्तमान की बात करें तो पूंजी और उसका विवेकपूर्ण निवेश ही किसी उद्यम की सफलता या व्यक्ति के लाभ का निर्धारण करती है। ऐसे में उन लोगों के बारे में जानना निश्चित ही दिलचस्प होगा जो पूंजी और निवेश के इस समीकरण को समझते हैं और इसे व्यापक राष्ट्रीय लाभ के लिए उपयोग में लाते हैं। इन्वेस्को म्यूचुअल फंड के सीईओ सौरभ नानावटी भी ऐसे ही व्यक्तित्व के परिचायक हैं।

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मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में, सौरभ इनवेस्को के लिए भारत में एसेट प्रबंधन का दायित्व निभाते हैं। साथ ही वो इनवेस्को इंडिया के लिए व्यापार रणनीति, निवेश, संचालन और बिक्री सहित सभी कार्यों की देखरेख करते हैं। वे 2002 से परिसंपत्ति प्रबंधन उद्योग में हैं। इनवेस्को में शामिल होने से पहले सौरभ ने 2006 और 2007 के बीच एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य निवेश अधिकारी के रूप में कार्य किया। उन्होंने ड्यूश एसेट मैनेजमेंट (भारत) के लिए संस्थागत बिक्री के प्रमुख के रूप में भी कार्य किया। वह एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स ऑफ इंडिया (एएमएफआई) के बोर्ड में निदेशक भी हैं। इसके अतिरिक्त इन्होंने एमएफ यूटिलिटीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

सौरभ मुंबई से एक डॉक्टर परिवार से आते  हैं। इन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी की विवेकानंद कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इसके बाद इन्होंने फाइनेंस से जमनालाल बजाज यूनिवर्सिटी से एमबीए किया, जिसके बाद इनके पेशेवर कैरियर की शुरुआत हुई। म्यूच्यूअल फंड इंडस्ट्री में इनकी शुरुआत 2002 से होती है । इन्होंने 2 साल तक सिंगापुर में काम किया फिर कुछ पारिवारिक कारणों के चलते वापस आ गए। ये एचडीएफसी लाइफ में चीफ इंवेस्टमेंट ऑफिसर थे फिर ये इंवेस्को में आ गए। अब इंवेस्को से जुड़े इन्हें 15 साल हो चुके हैं। सौरभ बताते हैं कि “33 वर्ष की उम्र में मैं कंपनी का सीईओ बना। सबसे युवा सीईओ। इतना लंबा समय हो चुका है कंपनी में इसलिए मुझे‌ अन्य कंपनियों से ऑफर आते हैं। लेकिन यहां से एक आत्मीय जुड़ाव हो चुका है।”

कंपनी की ग्रोथ और आगामी योजना

सौरभ न तो बैंक चलाते हैं और ना ही बीमा कंपनी बल्कि ये ‘ऐसेट मैनेजमेंट म्युचुअल फंड्स’ का वैश्विक व्यवसाय संचालित करते हैं। आज  इनका कारोबार 25 देशों में है और  ये 1.6 ट्रिलियन डॉलर मैनेज कर रहे हैं। कंपनी के ग्रोथ की बात करें तो भारत में इसकी शुरुआत 2013 में हुई थी। 2016 में इनके पास 2 लाख खुदरा निवेशक थे जो आज 7 गुना बढ़कर 14 लाख हो गए हैं। यह वृद्धि अपने आप में उल्लेखनीय है। इसी प्रकार इनकी कंपनी के पास तब 50 हजार सिप थी आज 6 लाख हैं। इस संदर्भ में सौरभ कहते हैं “प्रत्येक साल इन्वेस्टर्स हम से जुड़ते जाते हैं। परफॉर्मेंस ठीक रहेगा तो इन्वेस्टर्स आएंगे। भारत के अलावा भी अन्य देशों में हम ऐसेट मैनेजमेंट कर रहे हैं। भारत और भारत के बाहर हम यदि सभी असेट्स को ऐड करें तो करीब 64 से 65 हजार करोड़ ऐसेट हम मैनेज कर रहे हैं।”

इसी बुनियाद को विस्तार देते हुए सौरभ कई अन्य योजनाओं पर काम कर रहे हैं। सौरभ की रणनीति यह है कि हर बाजार हर साल 20 से 30 प्रतिशत विस्तार पा रहा है तो‌ अगर आने वाले 3-4 वर्षों में इनके निवेशक की संख्या 14 लाख से बढ़कर 50 लाख तक पहुंचती है, तो यह कंपनी का वित्तीय आकार अपने आप बढ़ जाएगा। इसके लिए नए प्रोडक्ट लॉन्च करने और टेक्नोलॉजी पर निवेश बढ़ाने ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसके अलावा वो ब्लॉकचेन पर काम शुरू करने की योजना बना रहे हैं।

“हमने ब्लॉक चेन फंड के लिए सेबी से अगस्त में आवेदन किया था। वहॉं से अप्रूवल भी हमें मिल गया है।  20 नवंबर में हम इसे शुरू करने जा रहे थे लेकिन वर्ल्ड कप के दौरान क्रिप्टो के फुल पेज के विज्ञापन आने लगे, जिससे लोगों को एक भ्रम हो गया कि यह भी एक क्रिप्टो ही है। हमें लगा कि हमें थोड़ा रुकना चाहिए यह समय सही नहीं है”, ब्लॉकचेन की योजना के बारे में सौरभ बताते हैं। अब जबकि इसके लिए संसद में सभी लोग प्रयास कर रहे हैं और प्रधानमंत्री ने भी रिव्यू की बात की है तो सौरभ की योजना है कि इसे एक साथ शुरू करें ताकि लोगों को किसी प्रकार का कोई भ्रम ना रहे। वैश्विक रूप से देखें तो वॉलमार्ट आज ब्लॉकचेन यूज करता है। इसके भविष्य को लेकर कंपनी कोई संदेह नहीं है।

कोरोना काल और निवेश

कोरोना के बाद बाजार जब शुरू हुआ तो लगभग 3 महीने निवेशकों को थोड़ी बहुत दिक्कत आती रही। पिछले कई सालों से विशेष रूप से पिछले कुछ महीनों में म्यूच्यूअल फंड्स ने बहुत मेहनत की है। सेबी के नियम कानून भी बेहद सख्त हैं। इससे एक जो चीज लोगों को समझ आई है वह यह है कि लोगों ने यह समझा है कि म्यूच्यूअल फंड एक लॉन्ग टर्म इंस्ट्रूमेंट है। कोरोना के दौरान के अगर  दो-तीन महीने देखें तो उस समय मार्केट काफी ज्यादा गिरा। दूसरे फंड्स की साख भी गिरी। इस वजह से लोगों को तकलीफ भी हो रही थी। लेकिन उस दौरान जिन्होंने भी निवेश करके वे दो-तीन महीने निकाल लिए उन्होंने काफी अच्छा रिटर्न देखा है। दिलचस्प बात है कि इस दौरान जब लोग घर पर थे तो उन्होंने अपने डीमैट अकाउंट खुलवाए,स्टॉक ब्रोकिंग अकाउंट खुलवाए और निवेश कार्यों में लगे। निःसंदेह पिछले डेढ़-दो साल के बीच लोगों को कोविड के चलते कामकाज में समस्याएं आई है, लेकिन एक कंपनी के तौर पर इंडस्ट्री में सौरभ की कंपनी की स्थिति बेहतर हुई है।

सौरभ के अनुसार “हमारे निवेशक मार्केट में भागीदारी कर रहे हैं। स्टॉक मार्केट में म्युचुअल फंड्स में, रियल स्टेट के क्षेत्र में लोग रुचि दिखा रहे हैं।” इससे एक ग्रोथ देखने को मिल रहा है। इसके आगे सौरभ यह भी जोड़ते हैं चूँकि फ़िक्स्ड डिपॉज़िट पर ब्याज दर कम कर दी गई और महँगाई दर लगातार बढ़ रही है तो लोग म्युचुअल फंड्स की ओर तेजी से आकर्षित हुए हैं।

कोविड के साथ साथ अमेरिकी ब्याज दर नीति का भी बाजार पर प्रभाव पड़ा है। और इसे केवल अमेरिका के संदर्भ में ही देखना सही नहीं होगा, यूरोप के कई देशों में नकारात्मक ब्याज दर है। इसका असर इक्विटी मार्केट पर बहुत ज्यादा पड़ता है। जिस तरह से मुद्रास्फीति बढ़ रही है इसका प्रभाव आने वाले 6 महीने तक बना रहेगा। भारत में और विश्व भर में लगभग जून तक इसका प्रभाव बना रहेगा। आपूर्ति पक्ष भी सिकुड़ रहा है। किसी भी चीज के निर्माण के लिए जो आवश्यक सामग्री होंगी वह कंपनियों को आसानी से नहीं मिल पा रही हैं या नहीं मिल पाएंगी। कुछ चीजें चीन में बनती हैं कुछ ताइवान में बनती हैं तो अगर समन्वय नहीं बनेगा, समस्या आएगी ही। इस संदर्भ में सौरभ का मानना है कि “इसके चलते भारत के बाजारों में जो पहले डिस्काउंट देखने को मिलते थे वह बंद हैं। इन सारी चीजों के चलते इन्फ्लेशन तो आएगा। आने वाले दिनों में केंद्रीय बैंकों को रेट्स बढ़ाने पड़ेंगे, इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है।”

प्रौद्योगिकी विकास और निवेशक शिक्षा

सौरभ अपनी कंपनी के विस्तार के लिए न केवल नई प्रौद्योगिकी को अपनाने को लेकर सजग हैं बल्कि वो निवेशकों को जागरूक करने में भी सक्रियता से जुटे हैं। कोविड के दौरान तो प्रौद्योगिकी की आवश्यकता से सभी रूबरू हुए ही। यदि  डिजिटल रूप से सक्षमता नहीं होती तो यह पूरी इंडस्ट्री ही संचालित नहीं हो पाती। निवेशकों को उनके मोबाइल पर निवेश करने और उसे समझने की जो सुविधा ने इंडस्ट्री का विस्तार किया है। टेक्नोलॉजी का बहुत बड़ा असर इन्वेस्टमेंट पर भी पड़ रहा है। आज हम क्रॉस वेरिफिकेशन कर सकते हैं, दूसरी कंपनियों में क्या परिवर्तन आ रहे हैं इसका भी हम पता कर सकते हैं। सौरभ कहते हैं कि शुरू के जब 8 महीने जब सब कुछ लगभग बंद था इस दौरान वो ऑफिस में अकेले होते थे। कोई स्टाफ नहीं था, सिर्फ वो और वॉचमैन। लेकिन इस दौरान भी इंडस्ट्री ठीक से काम कर पाई क्योंकि तकनीक ने इसे संभव बनाया।

निवेशकों की शिक्षा के बारे में सौरभ कहते हैं कि यह बहुत ज्यादा जरूरी है। ऐसा इसलिये कि भारत में ‘यूनीक इन्वेस्टर्स’ सिर्फ 2 करोड़ हैं जबकि चीन में इसकी संख्या 60 करोड़ है। वस्तुतः सभी देशों में एक बुनियादी प्रवृत्ति देखने को मिलती है कि जैसे-जैसे प्रति व्यक्ति आय बढ़ती जाती है तो जो अतिरिक्त आय होती है वह उपभोग में खप जाता है। आज भारत की प्रति व्यक्ति आय मोटा मोटी $2000 है और चाइना की $10000 है। तो जिस तरह से चीन में म्यूच्यूअल फंड इन्वेस्टर्स हैं उसी तरह भविष्य में यहॉं भी हम म्यूच्यूअल फंड इन्वेस्टर्स संख्या में वृद्धि देख सकते हैं। सौरभ कहते हैं “हमें सतत वृद्धि हासिल करनी है। नंबर ऑफ इन्वेस्टर्स की ओर ध्यान देना होगा और जिस दिन यह नंबर ऑफ इन्वेस्टर्स 10 करोड़ हो जाएगी तो एयूएम बढ़ना ही बढ़ना है। हमारे जो भी ट्रेनिंग प्रोग्राम हैं उन्हें हम इधर भारत में लेकर आ रहे हैं। औसतन 1 वर्ष में हम 100 से 200 ट्रेनिंग प्रोग्राम करते हैं। लगभग 50 से 200 डिस्ट्रीब्यूटर ट्रेनिंग में हिस्सा लेते हैं।”

लाभ का मंत्र

यद्यपि म्युचुअल फंड बेहतर प्राप्ति के लिये जाना जाता है लेकिन यह सबको प्राप्त नहीं हो पाता है। अक्सर निवेशकों को नुकसान भी झेलना पड़ता है। सौरभ कहते हैं “चूक यही है कि निवेशक पार्टिसिपेट नहीं करते। उन्हें पार्टिसिपेट करना चाहिए। दूसरी यह कि जब भी पार्टिसिपेट करते हैं तब बैलेंस खो देते हैं।” सौरभ आगे जोड़ते हैं कि आपकी आवश्यकता क्या है इस को ध्यान में रखकर ऐसेट एलोकेशन क्या होना चाहिए। यह एक लॉन्ग गेम है और अगर आपके पास इतनी दूरदर्शिता नहीं है तो फिर आप हमेशा इसकी टाइमिंग से मार खाएंगे। इस बात की पुष्टि के लिए सौरभ एक उदाहरण भी देते हैं। “वारेन बफेट के फंड्स ने जितने रिटर्न दिए हैं पिछले 30 साल 40 साल में, इन्वेस्टर्स ने उसका आधा ही रिटर्न बनाया है। यदि वारेन बफेट ने 15 टका बनाया है तो इन्वेस्टर्स सिर्फ 7 टका ही बना पाए।‌ ऐसा इसलिए क्योंकि इन्वेस्टर्स यह सोचता है कि कब मैं निवेश शुरू करूं और कितना जल्दी से निकल जाऊं”, सौरभ अपनी बात समझाते हैं।

सौरभ को अपने परिवार के साथ समय गुजारना बेहद पसंद है। सोमवार से शुक्रवार का समय वो ऑफिस को देते हैं और शनिवार, रविवार का समय अपने परिवार के साथ बीताते हैं। इन्हें पढ़ना बहुत पसंद है और ये अभी भी कंपनी की बैलेंस शीट देखते हैं। युवाओं को सलाह देते हुए सौरभ कहते हैं कि “जोखिम लीजिए, जिंदगी पड़ी है जोखिम लीजिए। यदि आपको लोग पैसे दे रहे हैं तो उसे अब फिजूल मत समझिए। उसमें एक विश्वास की भावना रहती है। मुझसे आज भी यदि कोई शिकायत करे कि आप के शेयर 2 टका गिर गए हैं तो मैं उससे बात करता हूँ। मुझे यह फर्क नहीं पड़ता कि किसने 10000 का इन्वेस्ट किया है और किसने 10 करोड़ का इन्वेस्ट किया है, मेरे लिए सभी जरूरी हैं।”

 

 

 

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