आईपीएस असीम अरुण मांग रहे चुनावी चंदा कमिश्नर का पद छोड़कर चुनाव मैदान में उतरे

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कानपुर के पूर्व पुलिस कमिश्नर असीम अरुण करोड़पति प्रत्याशी हैं। एक पैतृक आवास समेत कुल 3 मकान हैं। गोमतीनगर के एचडीएफसी बैंक में असीम के खाते में 10.86 लाख रुपए हैं। वो करीब 45.66 लाख की चल संपत्ति के मालिक हैं। आप सोच रहे होंगे, हम आपको कन्नौज सीट से भाजपा प्रत्याशी की संपत्तियों का ब्योरा क्यों दे रहे हैं।

इसकी जरूरत इसलिए पड़ी हैं, क्योंकि असीम अब जनता के सामने खुलकर वोट के साथ नोट भी मांग रहे हैं। उन्हें चुनावी चंदा चाहिए, ताकि वो प्रचार कर सके।

राजनीति के जानकार मानते हैं कि ये चुनावी पैतरा दरअसल जनता के बीच ईमानदार छवि को बनाने में मददगार होता हैं। सपा के गढ़ कन्नौज में उन्हें ऐसी ही छवि की आवश्यकता भी है। असीम अरुण ने हाल ही में अपने पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्त होकर राजनीतिक सफर की शुरुआत की है। वह भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ रहे हैं। असीम ने कहा है, ‘चुनाव लड़ने के लिए धन की जरूरत है, लेकिन इसके लिए वह अपने विचारों से समझौता नहीं कर सकते हैं।

इसलिए वो सीधे जनता से रुपए मांग रहे हैं। चुनावी चंदा का उपयोग प्रचार में किया जाएगा। हाल में उन्होंने एक सार्वजनिक मंच से कहा, ‘मैं अपने जीवन को एक ऐसा प्रयोग मानता हूं, जिसमें अब मैं यह परख रहा हूं कि क्या ईमानदारी का रास्ता छोड़े बिना राजनीति में शामिल होना संभव है?’

कन्नौज में सपा लगा चुकी है जीत की हैट्रिक

बता दें, कन्नौज सीट पर समाजवादी पार्टी जीत की हैट्रिक लगा चुकी है। पिछले तीन चुनाव लगातार जीत चुके सपा के अनिल दोहरे इस बार भी मैदान में हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने असीम अरुण को उनके मुकाबले में उतारा है। इस सीट पर तीसरे चरण के चुनाव के दौरान 20 फरवरी को मतदान होना है।

भाजपा के करोड़पति प्रत्याशी हैं असीम

आइए आपको असीम अरुण की संपत्ति का एक छोटा ब्योरा देते हैं। 2022 में दाखिल शपथपत्र के अनुसार उनकी सालाना कमाई 28.17 लाख है। 2017 में उनकी कमाई 16.62 लाख थी। उनकी पत्नी ज्योत्स्ना की सालाना आय 31.15 लाख है। गोमतीनगर के एचडीएफसी बैंक खाते में 10.86 लाख का बैलेंस है। वो एक इंडिगो और नैनो कार रखते हैं। उनके पास 60 हजार रुपए का सोना है। उनकी कुल अचल संपत्ति की वैल्यू 1.52 करोड़ है। जबकि 45.66 करोड़ की चल संपत्ति के वो मालिक हैं।

गोवा में AAP की आनोखी शर्त

विधानसभा उम्मीदवारों से कानूनी हलफनामा भरवाया, चुनाव जीतने पर पार्टी बदली तो FIR होगी

दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल को डर है कि गोवा में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उनके विधायक कहीं पार्टी ना बदल लें। इसके लिए उन्होंने एक कानूनी हलफनामे का सहारा लिया है। बुधवार को केजरीवाल गोवा पहुंचे, जहां उनकी मौजूदगी में सभी 40 विधायकों ने उस हलफनामे पर हस्ताक्षर किए। हलफनामे का उदेश्य है कि उनके कोई भी विधायक आम आदमी पार्टी छोड़कर किसी और पार्टी में न चले जाएं।

इस दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा, “किसी भी पार्टी के टिकट से नेता चुनाव लड़ते हैं और फिर जीतने के बाद पार्टी बदल लेते हैं। ये मतदाताओं के साथ धोखा होता है, इसलिए हम आज इस शपथ पत्र साइन कर रहे हैं।”

केजरीवाल बोलेविधायक काम नहीं करे तो FIR करे जनता

गोवा में प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने कहा कि चुनाव से पहले हमारे उम्मीदवारों ने आज एक हलफनामे पर हस्ताक्षर किए हैं और पार्टी के प्रति वफादार रहने और निर्वाचित होने पर ईमानदारी से काम करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि इस हलफनामें की कॉपी विधायकों के माध्यम से यहां कि जनता तक पहुंचाई जाएगी। इसमें लिखा है कि अगर चुनाव जीतने के बाद अगर हम पार्टी बदलते हैं या काम नहीं करते हैं तो जनता हम पर FIR करवा सकती है।

मेरे सारे उम्मीदवार ईमानदार

प्रेस वार्ता में केजरीवाल ने अपने विधायकों पर भरोसा जताते हुए कहा, ”वैसे तो हमारे सभी उम्मीदवार ईमानदार हैं, लेकिन मतदाताओं को यह विश्वास दिलाने के लिए इस हलफनामे की जरूरत है।” उन्होंने कहा कि हमारे उम्मीदवार अपने निर्वाचन क्षेत्र के हर घर में हस्ताक्षरित हलफनामे की फोटोकॉपी भेजेंगे। ऐसा करके, हम मतदाताओं को हलफनामे की शर्तों का उल्लंघन करने पर अपने उम्मीदवारों के खिलाफ विश्वासघात का मामला दर्ज करने का अधिकार दे रहे हैं।

 

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