अभूतपूर्व विकास यात्रा के नौ साल

आज आज़ादी के अमृतकाल में पंचप्रण को लेकर केंद्र की सरकार आगे बढ़ रही है। पंचप्रण में विकसित भारत का लक्ष्य, गुलामी के हर अंश से मुक्ति, अपनी विरासत पर गर्व, नागरिकों में कर्तव्य की भावना और एकता और एकजुटता के निर्माण को महत्व दिया जा रहा है। सचमुच का देखें तो इन पंचप्रण को विगत नौ वर्षों में पूर्ण करने की दिशा में काफी कार्य हुए हैं।

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प्रधानमंत्री मोदी के ९ साल देश सेवा, सुशासन और ग़रीब कल्याण के नजरिये से देश के लिए बेहद अहम रहे हैं। सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास का जो नारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया था, उसी ध्येय पर बढ़ते हुए देश विकास की नई बुलंदियों को छू रहा है और समाज के अंतिम पंक्ति में बैठा व्यक्ति भी मुख्यधारा से जुड़कर अपने उत्थान को महसूस कर रहा है। एक समय था जब देश में भ्रष्टाचार चरम पर था। यहां तक कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी भी यह मानते थे कि दिल्ली से एक रुपया गरीब तक पहुंचते पहुंचते मात्र १५ पैसा ही रह जाता है, लेकिन मोदी जी ने इस धारणा को तोड़ने का काम किया है और इसकी शुरुआत उन्होंने साल २०१४ में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही जनधन खाते खुलवाने के साथ किया। जिसके तहत हर गरीब का खाता खुला और अब सरकार की योजना का पैसा सीधे गरीब के खाते में आता है। यह नवाचार की एक क्रांतिकारी पहल थी जिसका परिणाम यह हुआ कि आज हर गरीब वंचित परिवार सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ प्राप्त कर रहा है। जनधन योजना देश के गरीबों तक सरकार की पहुँच सुनिश्चित करने का सबसे बड़ा माध्यम बना और उसी के फलस्वरूप आज सरकार तमाम गरीब कल्याण की योजनाओं का सफल क्रियान्वयन कर रही है।

कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को मिला बल

अन्न से अंत्योदय को मूल मंत्र मानकर हर ग़रीब को न केवल मुफ्त़ राशन प्रधानमंत्री मोदी ने मुहैया कराया, बल्कि हर गरीब का अपना आशियाना हो, गरीबों का यह स्वप्न भी मोदी जी के कार्यकाल में साकार हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी जी की देन है कि आज हर गरीब सम्मानित जीवन जी रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व

में केंद्र सरकार ने कोरोना काल जैसी महामारी में ८० करोड़ से अधिक देशवासियों को मुफ्त राशन की व्यवस्था दी। इस योजना की शुरुआत अप्रैल २०२० में प्रधानमंत्री गरीब कल्याीण अन्न योजना के रूप में की गई थी। जिसे साल २०२४ तक बढ़ा दिया गया है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी ने गरीबों के सिर पर छत का सपना साकार किया है। इसके अंतर्गत ग्रामीण आवास योजना के तहत ३ करोड़ पक्के घरों का निर्माण किया। साथ ही शहरी आवास योजना में भी ५८ लाख पक्के मकानों का निर्माण किया जा चुका है। इस योजना में प्रत्येक लाभार्थी को रसोई गैस के साथ शौचालय, बिजली और पानी की सुविधा भी दी गई है। इन नौ वर्षो में १२ करोड़ घरों में पानी के कनेक्शन दिए हैं, उज्ज्वला योजना के तहत ९.६० करोड़ रसोई गैस कनेक्शन दिए हैं। जिसने माताओं-बहनों को जहरीले धुएँ से निजात दिलाई।

पंच प्रण को मिली प्राथमिकता

कांग्रेस के शासनकाल में भ्रष्टाचार और घोटाला ही दिल्ली में बैठी सरकार की पहचान थी, लेकिन उस पहचान को दरकिनार कर सरकार को जनता के बीच लाकर देशहित और राष्ट्र प्रथम की भावना को तरज़ीह दी गई है। यही वजह है कि आज आज़ादी के अमृतकाल में पंचप्रण को लेकर केंद्र की सरकार आगे बढ़ रही है। पंचप्रण में विकसित भारत का लक्ष्य, गुलामी के हर अंश से मुक्ति, अपनी विरासत पर गर्व, नागरिकों में कर्तव्य की भावना और एकता और एकजुटता के निर्माण को महत्व दिया जा रहा है। सचमुच का देखें तो इन पंचप्रण को विगत नौ वर्षों में पूर्ण करने की दिशा में काफी कार्य हुए हैं। नौ साल, सिर्फ सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण का नहीं है, अपितु विकसित भारत की आधारशिला और नवपरिवर्तन की नींव रखने का कार्य हो रहा है। जिसका परिणाम आज देश नये संसद भवन, कर्तव्य पथ, सिंगोल की स्थापना, राम मंदिर निर्माण के रूप में देख रहा है।

स्वस्थ भारत, खुशहाल भारत की पड़ी बुनियाद

ग़रीबी-भुखमरी ही पूर्ववर्ती सरकार में चर्चा का विषय रहता था, लेकिन आज संवैधानिक और मूलभूत मूल्यों का संरक्षण हो रहा है। यही वजह है कि सभी गरिमामय जीवन जी रहे हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश ने विगत नौ सालों में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। जिसकी बदौलत स्वास्थ्य सुविधाओं की सुलभ पहुँच समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रही है। स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष्मान भारत योजना के तहत ५० करोड़ लाभार्थियों को कवर किया गया है। आज भारत स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बेहतर स्थिति में खड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के साथ भारत का भविष्य सुरक्षित बन रहा है, केंद्र की सरकार इस दिशा में ६४,१८० करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। एक समय था, जब देश बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए विदेशों पर निर्भर था, लेकिन कोरोना काल में हमने दुनिया के अधिकतर देशों को वैक्सीन देकर इस क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता का परिचय दिया।

सामाजिक न्याय बनी सरकार की पहचान

समाज के हर वर्ग को सम्मान दिलाने का भाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रखते हैं। मोदी कैबिनेट में तकरीबन ६० प्रतिशत सदस्य शोषित, वंचित और पिछड़े वर्ग से आते हैं। समाज के अंतिम व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने का काम विगत नौ वर्षों में हुआ है। द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर आदिवासी समाज को गौरवान्वित होने का अवसर प्रधानमंत्री मोदी ने दिया है। जनजातीय गौरव दिवस, बाबा साहब के पंचतीर्थ बनाने आदि का कार्य मोदी सरकार के सामाजिक न्याय की एक महत्वपूर्ण प्रतिबिंब है। ४५ करोड़ गरीबों का बिना भेदभाव जनधन खाते खोलना सामाजिक न्याय के समावेशी एजेंडे का जीता जागता उदाहरण है। गरीब पूर्ववर्ती सरकारों में बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने का स्वप्न भी नहीं देख पाए थे, लेकिन मोदी सरकार में हर समाज का उत्थान और कल्याण हो रहा है। कल्याणकारी राज्य की जो अवधारणा हमारे संविधान में व्यक्त की गई थी, उसे मूर्त रूप केंद्र की वर्तमान सरकार दे रही है। मोदी जी की सरकार में गरीबों का कल्याण तो हो ही रहा, साथ में पारदर्शी शासन व्यवस्था की जो नींव मोदी सरकार में पड़ी है, वह आगामी समय में एक विकसित और समृद्ध भारत के विकास में अहम योगदान देगी।

सांस्कृतिक अभ्युदय की दिशा में बढ़े कदम

आज भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व ने आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण और तकनीकी प्रगति पर तो जोर दिया ही, साथ ही देश की संप्रभुता, सुरक्षा और सांस्कृतिक गौरव को मोदी शासन काल में तरजीह मिली। जिसका परिणाम यह हुआ कि भारत का सांस्कृतिक अभ्युत्थान हो रहा है। आज जब दुनिया में अयोध्या के भव्य राम मंदिर, वाराणसी में मां गंगा और विहंगम काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, प्रयागराज के कुंभ, उज्जैन में महाकाल दरबार की चर्चा होती है तब ये लगता है कि भारत की सांस्कृतिक ख्याति पुनर्स्थापित हो रही है। हाल ही में हमारी सांस्कृतिक धरोहरों और हमारी आध्यात्मिक पहचान को समेटे हुए स्थापित हुई नई संसद ने ये एहसास और पुख्ता किया है। नई संसद में पूरे विधि विधान से राजदंड सेंगोल की स्थापना ने ये एहसास भी करा दिया है कि राजधर्म के पालन में मोदी पीछे हटने वाले नहीं, फिर चाहे कितनी भी चुनौतियां सामने क्यों न आएं।

आदर्श तिवारी